बुंदेली कॉमेडी के इस तीसरे भाग में सुनिल देवराज ग्रामीणों के बीच शादी और रिश्तों को लेकर होने वाली नोकझोंक और खींचतान को दिखा रहे हैं। गाँव के माहौल में उलझे पात्र अजीबोगरीब स्थितियों का सामना करते हैं।
भगिरथ लोधी की इस बुंदेली कॉमेडी में, एक परिवार में दामाद और सास के बीच पहनावे को लेकर तीखी बहस होती है। कम सुनने की समस्या और गलतफहमी के कारण घर में हंसी-मजाक का माहौल बन जाता है।