हिमालय का एक रहस्यमय सिद्ध योगियों का आश्रम अद्भूत,अद्वितीय,अनिर्वचनीय व आश्चर्यजनक जहां पहुंचना ही जीवन की पूर्णता है|_. _*"सिद्धाश्रम"*_
सिद्धाश्रम एक अत्यंत उच्चकोटि की भावभूमि पर एक अत्यन्त सिद्ध आश्रम है जो कई वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इसके एक ओर कैलाश मानसरोवर है दूसरी ओर ब्रह्म सरोवर है और तीसरी ओर विष्णु तीर्थ है। इन तीनों पुण्य स्थलियों के बीच यह सिद्धाश्रम स्थित है। स्वयं विश्वकर्मा ने ब्रह्मादि के कहने पर इस आश्रम की रचना की।परमहंस स्वामी सच्चिदानंद प्रभु जिनकी आयु हजारों-हजारों वर्षो की है और जो समस्त गुरुओं के गुरु हैं वे इस श्रेष्ठतम आश्रम के संस्थापक, संचालक एवं नियंता हैं। सच्चिदानंद जी के बारे में स्वयं ब्रह्मा ने कहा है कि वे साक्षात ब्रह्मा का मूर्तिमय पुंज है।भगवान शिव ने उनको आत्म स्वरुप कहा है और सभी देवी-देवता उनकी एक झलक पाने को लालायित रहते हैं। सिद्धाश्रम में चारों ओर दिव्य स्फटिक शिलाएं देखने को मिलती हैं जिस पर हजारों वर्ष के योगी साधनारत एवं समाधिस्थ हैं। वहां जगह-जगह पर दिव्य कल्पवृक्ष देखने को मिलते हैं जिनका विभिन्न शास्त्रों में वर्णन है।