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ATRANGI SHAAM

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इत्र कि महक जिस तरह इन हवाओं में है, उसी तरह से बसा है तु मेरे जहन में अश्कों से भरे नयनों में ठहरा हुआ पल आज भी उसमें डूबा हुआ है इस तरह