नाहं वसामि वैकुण्ठे
न योगिनां हृदये रवौ ।
यत्र राधापदच्छाया
तत्र तिष्ठामि नारद ॥
भावार्थ: जहाँ राधा के चरणों की छाया है, वहीं कृष्ण का नित्य वास है।
राधे मेरी स्वामिनी,में राधे को दास, जनम जनम मोहे दीजिये श्री वृंदावन वास।
वृंदावन मई वृक्ष को मरम ना जाने कोय। डाल डाल अरु पात पात पे राधे राधे होय।
🌺 श्री राधा नाम 12 नाम-माला (जप क्रम में)
ॐ श्री राधे नमः
ॐ श्री राधिकायै नमः
ॐ श्री राधा प्रेमस्वरूपायै नमः
ॐ श्री राधा महाभावस्वरूपायै नमः
ॐ श्री राधा कृष्णात्मिकायै नमः
ॐ श्री राधा करुणामयी नमः
ॐ श्री राधा कृपानिधये नमः
ॐ श्री राधा शरण्यायै नमः
ॐ श्री राधा वृन्दावनेश्वरी नमः
ॐ श्री राधा रसिकेश्वरी नमः
ॐ श्री राधा प्रेममयी नमः
ॐ श्री राधा सर्वानन्दमयी नमः
🌹श्री राधे 🌹जय श्री राधेकृष्णा 🌹
🌹श्री राधे 🌹जय श्री राधेकृष्णा 🌹