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पुने गोंडी धर्म दर्शन : प्रकृति, संस्कृति और जीवन का आदिवासी मार्ग कोया पुने गोंडी धर्म दर्शन भारत की प्राचीनतम आदिवासी धार्मिक परंपराओं में से एक है। यह धर्म विशेष रूप से गोंडी समाज से जुड़ा हुआ है, जो मध्य भारत, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में निवास करता है। कोया पुने केवल एक धर्म नहीं, बल्कि एक संपूर्ण जीवन पद्धति, सामाजिक व्यवस्था और प्रकृति से जुड़ा हुआ दर्शन है, जो मानव और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखने की शिक्षा देता है। गोंडी धर्म का मूल आधार प्रकृति पूजन है। गोंडी समाज मानता है कि जल, जंगल, ज़मीन, पहाड़, सूर्य, चंद्रमा, अग्नि और वायु सभी जीवित शक्तियाँ हैं। इन्हीं शक्तियों के सम्मान और संरक्षण में मानव का कल्याण निहित है। कोया पुने धर्म में किसी एक मूर्ति या भवन केंद्रित पूजा की बजाय प्राकृतिक स्थलों जैसे पहाड़, नदी, पेड़, जंगल और ग्राम देव स्थानों को पवित्र माना जाता है। कोया पुने गोंडी धर्म दर्शन में पेन देवता का विशेष स्थान है। पेन देवता को गोंडी समाज अपने पूर्वजों और प्रकृति शक्तियों का प्रतिनिधि मानता है। ये देवत