NIN भारत के उन करोड़ों दबे और वंचित लोगों की आवाज है, जिनका सदियों से एक लोकतांत्रिक समाज में सम्मान और स्वाभिमान से जीने का सपना आज भी अधूरा है.
यह संघर्षरत भारत है, लेकिन उनका जीवन संघर्ष और उनकी वेदना को मेनस्ट्रीम मीडिया, अखबार और चैनल जगह नहीं देते. अपनी आर्थिक और उच्चवर्णीय सामाजिक संरचना के कारण भारतीय मीडिया इस वंचित बहुसंख्यक आबादी के शत्रु का काम करता है. उच्चवर्णीय मीडिया में जो कुछ तथाकथित प्रगतिशील या दयालु लोग हैं, उनकी एकमात्र भूमिका मेनस्ट्रीम मीडिया के बारे में भ्रम बनाए रखने की है.